शहडोल/बुढ़ार: जिले के बुढ़ार थाना क्षेत्र अंतर्गत मुरलिया बाग रोड पर स्थित एक आदिवासी परिवार की पुश्तैनी जमीन और उस पर बने प्रधानमंत्री आवास को लेकर विवाद गहरा गया है। पीड़ित आदिवासी युवक ने स्थानीय निवासी राजेश चमड़िया पर मकान खाली कराने के लिए जान से मारने की धमकी देने, घर का ताला तोड़ने और जबरन कब्जा करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक (SP) शहडोल को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
बुढ़ार के मुरलिया बाग रोड निवासी प्रार्थी पुष्पेन्द्र कोल (पिता हीरालाल कोल) ने अपनी शिकायत में बताया कि वह और उसका परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से उक्त भूमि पर निवासरत है। इसी जमीन पर शासन की महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री आवास' के तहत उनका पक्का मकान भी बना हुआ है, जिसका नगरपालिका टैक्स भी उनके पिता के नाम से नियमित रूप से जमा होता आ रहा है।
पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय निवासी राजेश चमड़िया (पिता पवन चमड़िया) द्वारा उन पर यह कहकर घर खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है कि यह अवैध कब्जा है। प्रार्थी के अनुसार, आरोपी ने धमकी दी है कि यदि मकान खाली नहीं किया तो पूरे परिवार को झूठे केस में फंसा दिया जाएगा या जान से मरवा दिया जाएगा।
20-25 लोगों के साथ घर में घुसने और जेसीबी बुलाने का आरोप
पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में पुष्पेन्द्र कोल ने बताया कि दिनांक 28 जनवरी 2025 को दोपहर करीब 2 बजे घटना ने उग्र रूप ले लिया। आरोप है कि राजेश चमड़िया अपने साथ 20-25 अज्ञात लोगों और पटवारी को लेकर मौके पर पहुंचा। दबंगों ने घर का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और जेसीबी मशीन बुलाकर मकान को तोड़ने का प्रयास किया।
सीसीटीवी लगाकर निगरानी और जबरन हस्ताक्षर की कोशिश
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी द्वारा पीड़ित के घर के ठीक सामने सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए हैं, ताकि उनके परिवार की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। प्रार्थी ने बताया कि पूर्व में उसे पकड़कर जबरन किसी कागज पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश भी की गई थी, जिसके बाद वह वहां से जान बचाकर भागा था।
जान-माल का खतरा, एसपी से मांगी सुरक्षा
आदिवासी परिवार का कहना है कि आरोपी रसूखदार है और कभी भी उनके साथ कोई अप्रिय घटना घटित कर सकता है। पूरा परिवार इस समय भय के साये में जीने को मजबूर है। पुष्पेन्द्र कोल ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए और उनके परिवार की जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस मामले में पुलिस की जाँच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी कि क्या वैधानिक दस्तावेजों की अनदेखी कर आदिवासी परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है।

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