शहडोल/अमलाई - ओरिएंट पेपर मिल (Orient Paper Mill), अमलाई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मिल प्रबंधन पर आरोप है कि वह नियमों को ताक पर रखकर, बिना ट्रांजिट पास (TP) और आवश्यक दस्तावेजों की जांच किए, दलालों के माध्यम से उकेलिप्टिस (Eucalyptus) की खरीदी कर रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में वन विभाग और परिवहन नियमों की जहां खुली अनदेखी हो रही है, वहीं स्थानीय किसान आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं।
दलालों का सिंडिकेट और नियमों की अनदेखी
विश्वस्त सूत्रों और स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेपर मिल में उकेलिप्टिस खरीदी की प्रक्रिया में दलालों (Brokers) का वर्चस्व खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। आरोप है कि मिल प्रबंधन सीधे किसानों से संपर्क करने के बजाय बिचौलियों को प्राथमिकता दे रहा है। नियमनुसार, लकड़ी के परिवहन और बिक्री के लिए टीपी (ट्रांजिट पास) और अन्य दस्तावेज अनिवार्य होते हैं, लेकिन यहां बिना किसी जांच-पड़ताल के अवैध तरीके से माल खपाया जा रहा है।
किसानों का हो रहा दोहरा शोषण
इस अनियमितता का सबसे बड़ा खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। पीड़ित किसानों का कहना है कि दलाल पूरी तरह से मनमानी पर उतर आए हैं।
मनमाने दाम: किसानों की उपज के दाम दलाल तय करते हैं, जो बाजार मूल्य से काफी कम होते हैं।
तौल में गड़बड़ी: लकड़ी के वजन (तौल) में हेराफेरी कर किसानों को चूना लगाया जा रहा है।
कई मामलों में किसानों को यह तक पता नहीं चलता कि उनकी उपज आधिकारिक रूप से किस दर पर और किसके नाम से मिल में जमा की गई है।
परिणामस्वरूप, किसान अपनी ही फसल को सीधे मिल तक पहुंचाने में असमर्थ हैं और उन्हें मजबूरन बिचौलियों के माध्यम से औने-पौने दाम पर उपज बेचनी पड़ रही है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले पर कब संज्ञान लेते हैं। क्या किसानों को दलालों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी, या फिर नियमों की यह अनदेखी यूं ही जारी रहेगी? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

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