शहडोल - मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से देर रात 12 कोरोना मरीजों की हुई मौत ।
शनिवार रात 12 बजे ऑक्सीजन कम होते ही मरीज तड़पने लगे। इसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था के लिए अफरा तफरी मच गई। मेडिकल प्रबंधन ऑक्सीजन की सप्लाई का प्रेशर बनाने के लिए सिलेंडरों की व्यवस्था में जुट गया। ऑक्सीजन की कमी वाले 12 मरीजों से पहले मेडिकल कॉलेज में ही कोरोना के 10 और मरीजों की मौत हो गई थी। इस तरह शनिवार को कुल 22 मरीजों की जान गई।
अपर कलेक्टर ने की पुष्टि
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मिलिंद शिरालकर ने 6 मौतों की पुष्टि की। इसके थोड़ी देर बाद ही अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने 12 मौतें होने की जानकारी दी।
एक दिन पहले ही कमिश्नर ने मेडिकल कॉलेज शहडोल के आइसोलेशन वार्ड के निरीक्षण के दौरान निर्देश दिए कि थे कि सभी 30 ऑक्सीजनयुक्त बेड्स को आज शाम तक चालू कराएं I
कमिश्नर के निर्देशों के परिपालन में डीन मेडिकल कॉलेज डॉ० मिलिंद शिलारकर द्वारा आज सायं 9:00 बजे तक ऑक्सीजन मशीन युक्त बेड्स तो चालू हो चुके थे , पर ऑक्सीजन मशीन में ऑक्सीजन की ही सप्लाई नहीं थी।
मेडिकल कॉलेज के डीन के मुताबिक बताया गया की ऑक्सीजन की गाड़ी दमोह के रास्ते में फास गयी थी I
सवाल यह उठता है की जब ऑक्सीजन की कमी होती है तब ही ऑक्सीजन सिलिंडर आर्डर किये जाते है ,जबकि ऑक्सीजन सिलिंडर को पहले ही मगवाया जा सकता था कुछ घंटो की देरी से ऑक्सीजन सिलिंडर की गाड़ी पहुंचने 12 मरीजों ने अपनी जान गवा दी |
घटना के बाद मरीजों ने दिन में कमिश्नर राजीव शर्मा के दौरे पर भी सवाल उठाया। वे शनिवार को ही कोविड-19 सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने साफ-सफाई और बाकी व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने की बात कही थी। निरीक्षण के दौरान उनके साथ मेडिकल के डीन के अलावा कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा समेत कई अधिकारी और चिकित्सक मौजूद थे।

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