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शराब सिंडिकेट की मनमानी: रसूख के आगे नियम बौने, MRP से अधिक वसूली पर आबकारी विभाग ने साधी चुप्पी

शहडोल - जिले में शराब के नए ठेके शुरू होते ही ठेकेदारों की मनमानी और अवैध वसूली का खेल चरम पर पहुंच गया है। उपभोक्ताओं के हितों को ताक पर रखकर शहर की देशी और विदेशी शराब दुकानों पर खुलेआम MRP (अधिकतम खुदरा मूल्य) से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है। ताज्जुब की बात यह है कि इस लूट पर लगाम लगाने वाला आबकारी विभाग पूरी तरह मौन बना हुआ है, जिससे मिलीभगत की आशंका गहरा गई है।

जेब पर डाका: दर सूची और वसूली में जमीन-आसमान का अंतर:

नियमों के मुताबिक, किसी भी वस्तु को उसके अंकित मूल्य (MRP) से अधिक दाम पर बेचना दंडनीय अपराध है। लेकिन शराब दुकानों पर यह नियम केवल कागजों तक सीमित है। वर्तमान में कीमतों का गणित कुछ इस प्रकार है:

 उत्पाद (Quantity) | अंकित मूल्य (MRP) | वसूली जा रही

 देशी शराब (180ml)|             ₹65           |    ₹80

देशी शराब (375ml) |            ₹130          | ₹160

बीयर (विभिन्न ब्रांड)    |       निर्धारित दर    |₹20 से ₹30

भ्रष्टाचार का 'लिफाफा' कल्चर और अघोषित अहाते

सूत्रों के हवाले से सनसनीखेज खबर सामने आई है कि इस अवैध वसूली को संरक्षण देने के लिए भ्रष्टाचार का एक नया केंद्र हाउसिंग बोर्ड स्थित एक निजी आवास को बनाया गया है। चर्चा है कि इसी स्थान से विभागीय सांठगांठ और 'लिफाफा सिस्टम' का संचालन किया जा रहा है। एक पुराने और रसूखदार शराब ठेकेदार के नाम की चर्चा भी इस पूरे 'सेटलमेंट' के पीछे जोरों पर है, जिसका खुलासा जल्द होने की संभावना है।

इतना ही नहीं, नियमों को धता बताते हुए शराब दुकानों के बाहर ही खुलेआम मदिरापान कराया जा रहा है। दुकानों के सामने अघोषित 'अहाते' संचालित हो रहे हैं, जिससे न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि आम नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शराब दुकान में जब MRP से अधिक पैसे लेने पर ग्राहक पूछता है तो बोल दिया जाता है कि ठेका नीलामी महंगी हुई है तो वसूली तो ऐसे ही होगी।

प्रति दुकान 50 हजार की अतिरिक्त काली कमाई

बाजार विशेषज्ञों की मानें तो निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली के माध्यम से प्रत्येक दुकान पर प्रतिदिन 20 हजार रुपये से अधिक की अवैध कमाई की जा रही है। इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा रसूखदारों और कथित तौर पर विभागीय मशीनरी तक पहुंच रहा है, जिसके चलते शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब

जब इस गंभीर अनियमितता को लेकर आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह रटा-रटाया तर्क दिया। अधिकारियों का कहना है कि:

 "जिले में बड़ी संख्या में दुकानें संचालित हैं। मामला संज्ञान में आया है और शिकायत के आधार पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।"

सवाल यह उठता है कि: क्या आबकारी विभाग को इस खुलेआम चल रही लूट की जानकारी वास्तव में नहीं है, या फिर 'ऊपर तक' पहुंच रहे कमीशन ने जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी बांध दी है? अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन बेलगाम ठेकेदारों पर नकेल कसता है या जनता इसी तरह लुटती रहेगी।


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