शहडोल - मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण आदेश के बाद शहडोल शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में पदस्थ अधिकारी अरविंद कुमार पांडे की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा है, जिसे माननीय न्यायालय ने न केवल अनियमित माना है, बल्कि स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान में नियम विरुद्ध तरीके से पद धारण किए हुए हैं।
क्या है पूरा मामला?
रिट याचिका क्रमांक 15342/2023 की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय जबलपुर ने 17 फरवरी 2026 को अपना निर्णय सुनाया। न्यायालय के संज्ञान में यह तथ्य आया कि अरविंद कुमार पांडे की एपीसी (APC) / एडीपीसी (ADPC) के पद पर की गई प्रतिनियुक्ति की अवधि वर्ष 2018 में ही समाप्त हो चुकी थी।
नियमों के अनुसार, प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के पश्चात संबंधित लोक सेवक को उनके मूल विभाग या पद पर वापस भेज दिया जाना चाहिए था। हालांकि, तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि अवधि समाप्त होने के 8 वर्ष बाद भी वे वर्तमान में उसी पद पर कार्यरत हैं।
न्यायालय की तल्ख टिप्पणी-
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में अरविंद कुमार पांडे द्वारा पद धारण किए जाने को 'नियम विरुद्ध' और 'अनियमित' करार दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद भी पद से मुक्त न होना सीधे तौर पर न्यायिक आदेश की अवहेलना और प्रशासनिक स्वेच्छाचारिता की श्रेणी में आता है।
कार्रवाई की मांग-
इस खुलासे के बाद जिले के प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है कि आखिर किसके संरक्षण में एक अधिकारी न्यायालय के आदेशों को दरकिनार कर पद पर बना हुआ है। अब इस मामले में उच्च स्तर पर जांच की मांग उठ रही है ताकि:
संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाए।
नियम विरुद्ध पद पर बने रहने की अवधि के दौरान लिए गए वेतन और भत्तों की वसूली की जाए।
इस अनियमितता के लिए जिम्मेदार अन्य दोषियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक दृष्टिकोण: अब देखना यह होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन उच्च न्यायालय के इस स्पष्ट आदेश पर क्या कड़ा रुख अपनाता है। क्या नियम विरुद्ध पद पर आसीन अधिकारी को हटाया जाएगा या कानूनी जटिलताओं की आड़ में मामला फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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