शहडोल - शहर की यातायात व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है। एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर भीड़भाड़ वाले इलाकों में तेज रफ्तार गाड़ियाँ दौड़ाना अब एक आम चलन बन गया है, जो आम जनता की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। प्रशासन की ढील का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व व्यस्त सड़कों और संकरी गलियों में बेखौफ होकर गाड़ियाँ दौड़ा रहे हैं।
बाहरी राज्यों की गाड़ियों का संदिग्ध जमावड़ाशहर की सड़कों पर दिल्ली, हरियाणा और अन्य पड़ोसी राज्यों के नंबर वाली गाड़ियों की बाढ़ सी आ गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन गाड़ियों को चलाने वाले लोग यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस मामले में एक बड़ा कानूनी पहलू एनओसी (NOC) का भी है। नियमों के अनुसार, दूसरे राज्य से लाई गई गाड़ी का स्थानीय स्तर पर पंजीकरण और एनओसी अनिवार्य है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि शहर में दौड़ रही ऐसी अधिकांश गाड़ियों के पास वैध दस्तावेज नहीं हैं।
ध्वनि प्रदूषण: साइलेंसर के 'पटाखों' से दहशत
तेज रफ्तार के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी चरम पर है। मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बुलेट और अन्य स्पोर्ट्स बाइक हर गली-मोहल्ले में 'पटाखे' छोड़ती हुई गुजरती हैं। इससे न केवल बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को समस्या हो रही है, बल्कि यह पैदल चलने वालों के लिए भी मानसिक तनाव का कारण बन रहा है।
यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि जहाँ आम जनता इन समस्याओं से रोज जूझ रही है, वहीं यातायात पुलिस की मुस्तैदी कहीं नजर नहीं आ रही। मुख्य चौराहों से लेकर भीतरी रास्तों तक, इन 'दबंग' चालकों पर लगाम कसने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही है।
मुख्य मांगें और चिंताएं:
दस्तावेज जांच: बाहरी राज्यों की गाड़ियों के एनओसी और पंजीकरण की सघन जांच हो।
स्पीड लिमिट: रिहायशी इलाकों में गति सीमा निर्धारित कर इंटरसेप्टर तैनात किए जाएं।
साइलेंसर पर कार्रवाई: मॉडिफाइड साइलेंसर का उपयोग करने वालों पर भारी जुर्माना और वाहन जब्ती की कार्रवाई की जाए।
यदि समय रहते इन असामाजिक तत्वों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह अराजकता की भेंट चढ़ जाएगी।

0 टिप्पणियाँ