शहडोल - एक तरफ जहाँ आसमान से बरसती राहत की बूंदों ने मौसम को खुशनुमा बनाया है, वहीं दूसरी तरफ बुढ़ार चौक से बलपुरवा बस स्टैण्ड मार्ग के रहवासियों और छोटे व्यापारियों के ऊपर नगर पालिका परिषद शहडोल का एक नोटिस 'बिजली' बनकर गिरा है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा जारी एक आदेश में सड़क चौड़ीकरण (मॉडल रोड निर्माण) के नाम पर लोगों को अपने चबूतरे, रैंप, शेड और बाउंड्री वॉल हटाने के लिए मात्र 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। ऐसा न करने पर बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने और उसका खर्च भी जनता से ही वसूलने की चेतावनी दी गई है।
इस तुगलकी फरमान के बाद क्षेत्र के नागरिकों और दुकानदारों में भारी असंतोष और मायूसी का माहौल है। प्रभावितों का पक्ष पूरी तरह से व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण पर आधारित है।
जनता और व्यापारियों के मुख्य सवाल और परेशानियाँ:
भारी बरसात में निर्माण और तोड़फोड़ कैसे संभव?
प्रभावित मकान और दुकान मालिकों का कहना है कि इस समय मानसून पूरी तरह सक्रिय है। लगातार हो रही भारी बारिश के बीच किसी भी स्थाई या अस्थाई ढांचे को तोड़ना और फिर से नया निर्माण करवाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से असंभव है। सीमेंट-कंक्रीट का काम इस मौसम में टिक नहीं सकता।
रोजी-रोटी पर अचानक संकट:
बुढ़ार चौक से बलपुरवा मार्ग शहडोल का एक मुख्य व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ कई छोटे व्यापारी, गुमटी वाले और दुकानदार सालों से अपनी जीविका चला रहे हैं। अचानक 24 घंटे के भीतर दुकान का शेड या चबूतरा हटाने से उनका पूरा व्यवसाय ठप हो जाएगा। इस मंदी और बारिश के दौर में उनके सामने परिवार पालने का संकट खड़ा हो गया है।
आर्थिक नुकसान की दोहरी मार:
नोटिस में साफ लिखा है कि नुकसान के जिम्मेदार मकान-दुकान मालिक खुद होंगे। जनता का कहना है कि विकास के हम विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना किसी पूर्व तैयारी या पर्याप्त समय दिए, इस सीजन में तोड़फोड़ करने से लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान होगा, जिसकी भरपाई मध्यमवर्गीय परिवार कैसे करेंगे?
जनभावना: "विकास का स्वागत, लेकिन संवेदनशीलता भी जरूरी"
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को 'मॉडल रोड' बनाने की इतनी जल्दी है कि वह आम जनता की बुनियादी सहूलियत भूल गया। अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि कड़कड़ाती धूप या सामान्य दिनों में ऐसे काम फिर भी संभाले जा सकते हैं, लेकिन भारी बरसात में किसी का आशियाना या दुकान उजाड़ना कहाँ का न्याय है?
"हम प्रशासन से सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन हमें कम से कम मानसून बीतने तक का समय दिया जाना चाहिए। इस बारिश में अगर हमारी दुकानें और घरों के सामने के हिस्से तोड़ दिए गए, तो पानी सीधे अंदर घुसेगा और हमारा सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।"
"प्रभावित स्थानीय व्यापारी व रहवासी"
प्रशासन को इस मामले में मानवीय रुख अपनाना चाहिए। आयुक्त, कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को इस जनहित के मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए ताकि विकास के नाम पर इस भारी बारिश में आम नागरिकों को बेघर या बेरोजगार न होना पड़े। जनहित में इस कार्रवाई को मानसून के बाद तक के लिए टाला जाना ही न्यायसंगत होगा।

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