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नगर परिषद बकहो सीएमओ स्वतः भ्रस्टाचार में लिप्त,जहां बिना काम होता भुगतान

अमलाई/बकहो - नगर परिषद बकहो में शायद भ्रस्टाचार के अलावा कुछ होता ही नही है। अध्यक्ष उपाध्यक्ष में सामंजस्य नही होने एवं पार्षदों के विरोध के स्वर का फायदा उठा रहे कथित मजदूर इंजीनियर एवं सीएमओ ने तो भ्रस्टाचार की पूरी गाथा ही लिख डाली है। एक लाख की फिटकरी खरीद कर उपयोग कर ली, लाखो के केमिकल खरीद डाले, डीजल बिल की तो बात ही निराली है,डीजल पर्ची देकर पेट्रोल भरते तो कभी भी कर्मचारी पेट्रोल पंप में दिख जाएंगे। 3 किमी की नगर पालिका के 2 कचरा वाहनों में जो डीज़ल लगता है, उतना शायद ही किसी नगर पालिका में लगता होगा। स्टेशनरी की तो बात ही निराली है। 

पंप हाउस में पंप खरीदी,मटेरियल ख़रीदी एवं बेल्डिंग काम की तो बात ही क्या पूछनी? अभी तो 1 लाख की वाल्व खरीदी की फ़ाइल चर्चा में है? सूत्रों के अनुसार मात्र 25 हजार का भी समान नही लिया गया और 75 हजार का भ्रस्टाचार जोड़कर 1 लाख भुगतान की तैयारी है। परिषद में कोई काम हो या न हों लेकिन सीएमओ के अधिकार क्षेत्र में 50000 के अंदर की कई फ़ाइल जिनके काम 1-2 साल पहले हुए बताकर फ़र्ज़ी भुगतान किया जा रहा है।लगभग 1.5करोड़ का घोटाला अब तक किया जा चुका है। आगे भी प्रत्येक दिन नए नए घोटाले हो रहे है। जनमानस की मांग है कि तत्काल जैतहरी में पदस्थ अजीत रावत उपयंत्री को बकहो के प्रभार से मुक्त किया जाय एवं स्थायी सीएमओ की व्यवस्था की जाय ,तथा दैनिक वेतन भोगी मजदूर जो भ्रस्टाचारी है उन्हें काम मे न लगाया जाय, जिससे नगर परिषद बकहो के आस्तित्व को बचाया जा सके।

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